कहानी चिराग की
आखिरी लौ तक जलता रहा वो चिराग , और फिर धुप्प की आवाज के साथ बुझ गया। लगा मानो उसने कहा हो
"अलविदा ! अब मैं चलता हु। " उसके अलविदा कहने के साथ ही हल्का सा धुआँ सा उठा और दो क्षण में गुम हो गया कही देखते ही देखते।
लगता है ये धुआँ उस चिराग की आत्मा थी , जो कह कर गयी हो "जो सिर्फ चीजों का इस्तेमाल करना जानते हैं और अपना काम निकालते हैं। " ये बात इन्शान ने सुनी और चिराग से बोला ,
इन्शान : हम इन्शान हैं , जिन चीजों की तुम बात कर रहे हो वो हम ही बनाते और बिगाड़ते हैं। और तम्हे भी तो हमने ही बनाया था। तम्हारे जैसे कई चिराग हमने बनाये हैं। तुम अस्त हुए हो तो तम्हारे जैसा एक और तैयार बैठा है हमें सेवा देने के लिये।
ये सुनकर चिराग की आत्मा को बहुत दुःख हुआ। वो दुखी मन लेकर भगवान के दर पंहुचा। उसे देखकर बगवान पूछने लगे।
भगवान् : अरे चिगार,तुम उदास क्यों हो ?
चिराग: मैं आपसे नाराज हु।
(भगवान् मुश्कुराते हुए बोले )
भगवान् : क्यों नाराज हो मुझसे , मुझे भी तो बताओ।
चिराग : आपने मुझे इन्शान की तरह क्यों नहीं बनाया ? जैसे उन इन्शानो में घमंड है अपने इन्शान होने पर , मुझे भी घमंड होता। मैं भी अपनी मर्जी से हर काम कर पता , जब मन होता तब रौशनी देता , जब मन होता तब बुझ जाता।
चिराग की ये बात सुनकर ,भगवान् ने चिराग से पुछा : तुम कौन हो? तुम्हारा काम क्या है? तुम्हे धरती पर क्यों भेजा गया था?
चिराग ने बड़ी सरलता से जवाब दिया : मैं चिराग हूँ। मेरा काम रौशनी देना है। धरती पर प्रकाश करने के लिए मुझे भेजा गया था।
भगवान् : क्या तुमने अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाई ? तुम्हे कोई तकलीफ हुई जिम्मेदारी निभाने में?
चिराग : हाँ ! , मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई !
भगवान् : तो फिर तुम घमंड करके किस योग्यता पर करना चाहते हो? अपनी रौशनी पर ?
चिराग : हाँ , जब इन्शान किसी योग्यता के बिना ही घमंड कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं?
मैं तो सिर्फ खुद से जलने और बुझने की ख़्वाइश रखता हूँ।
भगवान् : सुनो चिराग जिन इन्शानो की तम बात कर रहे हो वो मेरे से ही बने हैं। उन्हें अभी ये ज्ञात नहीं है की वो कौन हैं। सारा संसार ही मेरा अंश है , जो इस चीज को जान लेता है वो कभी दूसरे से घृणा नहीं करता। एक दूरसे को ठगते नहीं , लूटते नहीं। ख़ुशी ख़ुशी एक दूसरे का साथ देते हैं।
मैं खुद उसका साथ देता हूँ , जो दूसरे का साथ देता है। सब मुझमे है , मैं ही सब हूँ।
भगवान् की बात सुन कर चिराग बोला : आपकी बाते मुझे समझ नहीं आई किन्तु इतना जरूर समझ गया हु कि अगर आपका साथ चाहिए तो जिस काम के लिए मुझे भेजा गया है वो मैं करू।मेरे जीवन का उद्देश्य मुझे पता है चल गया है। अब से मैं कभी ऐसी बात नहीं करूँगा।
चिराग खुश होकर चला जाता है दूसरे का घर रोशन करने। पर इन्शान आज भी नहीं बदला , उसे चीजों की इज्जत करना आज तक नहीं आया। चीजे इस्तेमाल करने के बाद फेकने की आदत हो गयी है। फिर उस चीज की याद तब आती है जब उसकी जरूरत होती है।
सीख : सभी के साथ समान व्यवहारऔर इज्जत करनीं चाहिए।
इन्शान : हम इन्शान हैं , जिन चीजों की तुम बात कर रहे हो वो हम ही बनाते और बिगाड़ते हैं। और तम्हे भी तो हमने ही बनाया था। तम्हारे जैसे कई चिराग हमने बनाये हैं। तुम अस्त हुए हो तो तम्हारे जैसा एक और तैयार बैठा है हमें सेवा देने के लिये।
ये सुनकर चिराग की आत्मा को बहुत दुःख हुआ। वो दुखी मन लेकर भगवान के दर पंहुचा। उसे देखकर बगवान पूछने लगे।
भगवान् : अरे चिगार,तुम उदास क्यों हो ?
चिराग: मैं आपसे नाराज हु।
(भगवान् मुश्कुराते हुए बोले )
भगवान् : क्यों नाराज हो मुझसे , मुझे भी तो बताओ।
चिराग : आपने मुझे इन्शान की तरह क्यों नहीं बनाया ? जैसे उन इन्शानो में घमंड है अपने इन्शान होने पर , मुझे भी घमंड होता। मैं भी अपनी मर्जी से हर काम कर पता , जब मन होता तब रौशनी देता , जब मन होता तब बुझ जाता।
चिराग की ये बात सुनकर ,भगवान् ने चिराग से पुछा : तुम कौन हो? तुम्हारा काम क्या है? तुम्हे धरती पर क्यों भेजा गया था?
चिराग ने बड़ी सरलता से जवाब दिया : मैं चिराग हूँ। मेरा काम रौशनी देना है। धरती पर प्रकाश करने के लिए मुझे भेजा गया था।
भगवान् : क्या तुमने अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाई ? तुम्हे कोई तकलीफ हुई जिम्मेदारी निभाने में?
चिराग : हाँ ! , मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई !
भगवान् : तो फिर तुम घमंड करके किस योग्यता पर करना चाहते हो? अपनी रौशनी पर ?
चिराग : हाँ , जब इन्शान किसी योग्यता के बिना ही घमंड कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं?
भगवान् बोले मैं कुछ समझा नहीं , विस्तार से बताओ।चिराग : धरती पर कई इन्शान हैं जो अपने माता - पिता की सम्पति के दम पर ही अपना खुश रहते हैं। कई लोग एक दूसरों को ठगते हैं, उसे ही अपनी ख़ुशी मानते हैं। लूटते हैं चोरी करते हैं।
मैं तो सिर्फ खुद से जलने और बुझने की ख़्वाइश रखता हूँ।
भगवान् : सुनो चिराग जिन इन्शानो की तम बात कर रहे हो वो मेरे से ही बने हैं। उन्हें अभी ये ज्ञात नहीं है की वो कौन हैं। सारा संसार ही मेरा अंश है , जो इस चीज को जान लेता है वो कभी दूसरे से घृणा नहीं करता। एक दूरसे को ठगते नहीं , लूटते नहीं। ख़ुशी ख़ुशी एक दूसरे का साथ देते हैं।
मैं खुद उसका साथ देता हूँ , जो दूसरे का साथ देता है। सब मुझमे है , मैं ही सब हूँ।
भगवान् की बात सुन कर चिराग बोला : आपकी बाते मुझे समझ नहीं आई किन्तु इतना जरूर समझ गया हु कि अगर आपका साथ चाहिए तो जिस काम के लिए मुझे भेजा गया है वो मैं करू।मेरे जीवन का उद्देश्य मुझे पता है चल गया है। अब से मैं कभी ऐसी बात नहीं करूँगा।
चिराग खुश होकर चला जाता है दूसरे का घर रोशन करने। पर इन्शान आज भी नहीं बदला , उसे चीजों की इज्जत करना आज तक नहीं आया। चीजे इस्तेमाल करने के बाद फेकने की आदत हो गयी है। फिर उस चीज की याद तब आती है जब उसकी जरूरत होती है।
सीख : सभी के साथ समान व्यवहारऔर इज्जत करनीं चाहिए।
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